Description
‘आध्यात्सिक जिज्ञासा’ नामक नया प्रकाशन पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करते हुए हमें अत्यन्त प्रसन्नता हो रही है। प्रस्तुत पुस्तक जिज्ञासु साधकों की आध्यात्मिक जिज्ञासा का सम्यक् समाधान तो करती ही है, इसके साथ ही रामकृष्ण संघ के उद्देश्य, कार्यों और प्रणालियों पर भी प्रकाश डालती है। यह पुस्तक रामकृष्ण संघ के अज्ञात, किन्तु महत्त्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाओं की भी साक्षी है।
रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के द्वादश परमाध्यक्ष, पूज्यपाद स्वामी भूतेशानन्दजी महाराज को श्रीमाँ सारदादेवी के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। इसके अतिरिक्त महाराजजी ने युगावतार भगवान् श्रीरामकृष्णदेव के कई अन्तरंग शिष्यों का दर्शन और सान्निध्य भी प्राप्त किया था। पूज्य महाराजजी चेरापूँजी, शिलांग, राजकोट आश्रमों के प्रभारी रहे और वहाँ विषम परिस्थिति में अद्भुत उल्लेखनीय कार्य भी किए। महाराजजी ने ऐतिहासिक राहत-कार्य भी किए। अन्त में दीर्घकाल तक रामकृष्ण मठ और मिशन के परमाध्यक्ष रहे।
इस पुस्तक में उनके द्वारा किये गये कार्यों और तत्कालीन घटित घटनाओं का मार्मिक विवरण है। इन सबके बीच सर्वाधिक उन्होंने साधनात्मक प्रश्नों के उत्तर अति सरल शब्दों में समझाये हैं। प्रस्तुत पुस्तक मानसिक विक्षेप, ध्यान की बाधाएँ, सेवा और कर्म के साथ साधना के समन्वय का दर्शन भी प्रदान करती है।
Contributors : Swami Bhuteshananda, Swami Prapattyananda






